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भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 -1859

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भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 -1859

Book Details

  • Author: काल मार्क्स

  • Edition: मार्च 2012

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170070082

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक काल मार्क्स द्वारा लिखे गए उन महत्वपूर्ण लेखों का संग्रह है, जो भारत के 1857–59 के राष्ट्रीय मुक्ति विद्रोह से संबंधित हैं। इस संग्रह का अधिकांश भाग उन लेखों पर आधारित है, जिन्हें कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक ऐंगल्स ने न्यू यॉर्क डेली ट्रिब्यून के लिए लिखा था। इन लेखों में 1857 के विद्रोह को केवल एक सैन्य घटना के रूप में नहीं, बल्कि औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक व्यापक जन-आंदोलन के रूप में देखा गया है।

पुस्तक में विद्रोह से ठीक पहले भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर लिखे गए 1853 के मार्क्स के लेख भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय इतिहास से संबंधित उनकी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ तथा पत्राचार के चयनित अंश भी इस संग्रह का हिस्सा हैं, जो उस समय भारत पर ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति की आलोचनात्मक समझ प्रदान करते हैं।

यह कृति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, औपनिवेशिक इतिहास और मार्क्सवादी दृष्टिकोण से इतिहास को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक तथ्यों और वैचारिक विश्लेषण के संयोजन के कारण यह पुस्तक इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए एक मूल्यवान संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।



$0.64

Original: $2.13

-70%
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Description

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  • Author: काल मार्क्स

  • Edition: मार्च 2012

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 8170070082

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक काल मार्क्स द्वारा लिखे गए उन महत्वपूर्ण लेखों का संग्रह है, जो भारत के 1857–59 के राष्ट्रीय मुक्ति विद्रोह से संबंधित हैं। इस संग्रह का अधिकांश भाग उन लेखों पर आधारित है, जिन्हें कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक ऐंगल्स ने न्यू यॉर्क डेली ट्रिब्यून के लिए लिखा था। इन लेखों में 1857 के विद्रोह को केवल एक सैन्य घटना के रूप में नहीं, बल्कि औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक व्यापक जन-आंदोलन के रूप में देखा गया है।

पुस्तक में विद्रोह से ठीक पहले भारत की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति पर लिखे गए 1853 के मार्क्स के लेख भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भारतीय इतिहास से संबंधित उनकी महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ तथा पत्राचार के चयनित अंश भी इस संग्रह का हिस्सा हैं, जो उस समय भारत पर ब्रिटिश औपनिवेशिक नीति की आलोचनात्मक समझ प्रदान करते हैं।

यह कृति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, औपनिवेशिक इतिहास और मार्क्सवादी दृष्टिकोण से इतिहास को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐतिहासिक तथ्यों और वैचारिक विश्लेषण के संयोजन के कारण यह पुस्तक इतिहास के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और जागरूक पाठकों के लिए एक मूल्यवान संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।