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भारतीय चिंतन परम्परा

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भारतीय चिंतन परम्परा

Book Details

  • Author: के. दामोदरन

  • Edition: अप्रैल 2011

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072300

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक भारतीय दर्शन और संस्कृति के ऐतिहासिक तथा वैचारिक अध्ययन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक के. दामोदरन इसमें बताते हैं कि भारतीय दर्शन और संस्कृति का व्यवस्थित एवं अकादमिक अध्ययन अपेक्षाकृत बहुत देर से, अठारहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में आरम्भ हुआ।

पुस्तक में 1784 में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ विद्वानों की पहल पर बंगाल में स्थापित एशियाटिक सोसाइटी को एक निर्णायक मोड़ के रूप में रेखांकित किया गया है। लेखक दिखाते हैं कि किस प्रकार इस संस्था की स्थापना ने भारतीय दर्शन, इतिहास, भाषा और संस्कृति के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा को बदल दिया और आधुनिक शोध की नींव रखी।

यह कृति भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक इतिहास और बौद्धिक परंपराओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और गंभीर पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऐतिहासिक दृष्टि, तथ्यपरक विश्लेषण और स्पष्ट प्रस्तुति के कारण यह पुस्तक भारतीय दर्शन और संस्कृति के आधुनिक अध्ययन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।

$1.28

Original: $4.26

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  • Author: के. दामोदरन

  • Edition: अप्रैल 2011

  • Cover: Paperback

  • ISBN: 9788170072300

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक भारतीय दर्शन और संस्कृति के ऐतिहासिक तथा वैचारिक अध्ययन पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण कृति है। लेखक के. दामोदरन इसमें बताते हैं कि भारतीय दर्शन और संस्कृति का व्यवस्थित एवं अकादमिक अध्ययन अपेक्षाकृत बहुत देर से, अठारहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में आरम्भ हुआ।

पुस्तक में 1784 में ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ विद्वानों की पहल पर बंगाल में स्थापित एशियाटिक सोसाइटी को एक निर्णायक मोड़ के रूप में रेखांकित किया गया है। लेखक दिखाते हैं कि किस प्रकार इस संस्था की स्थापना ने भारतीय दर्शन, इतिहास, भाषा और संस्कृति के वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा को बदल दिया और आधुनिक शोध की नींव रखी।

यह कृति भारतीय दर्शन, सांस्कृतिक इतिहास और बौद्धिक परंपराओं में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और गंभीर पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी है। ऐतिहासिक दृष्टि, तथ्यपरक विश्लेषण और स्पष्ट प्रस्तुति के कारण यह पुस्तक भारतीय दर्शन और संस्कृति के आधुनिक अध्ययन को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ मानी जाती है।