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नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रिए नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रिए जनसंख्या रजिस्टर का विरोध क्यों

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नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रिए नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रिए जनसंख्या रजिस्टर का विरोध क्यों

Book Details

  • Author: रणबीर सिंह यादव

  • Edition: अक्टूबर 2020

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक समकालीन भारतीय राजनीति और जनआंदोलनों के एक अत्यंत महत्वपूर्ण दौर को केंद्र में रखकर लिखी गई है। लेखक रणबीर सिंह यादव ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर भारत सरकार द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में कानून पारित किए जाने के बाद देशभर में हुए तथा चल रहे आंदोलनों को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की रचना की है।

किताब में इन कानूनों की पृष्ठभूमि, उनके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव तथा आम जनता की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि किस प्रकार ये कानून नागरिकता, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े व्यापक प्रश्नों को जन्म देते हैं। साथ ही, आंदोलनों के दौरान सामने आए जनभावनाओं, विरोध के स्वरूप और सामाजिक चेतना को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो समकालीन भारतीय राजनीति, सामाजिक आंदोलनों, लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक मुद्दों को गहराई से समझना चाहते हैं। विचारोत्तेजक भाषा और तथ्यात्मक संदर्भों के साथ लिखी गई यह कृति वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में भी देखी जा सकती है।



$0.75
नागरिकता संशोधन कानून राष्ट्रिए नागरिक रजिस्टर और राष्ट्रिए जनसंख्या रजिस्टर का विरोध क्यों
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Book Details

  • Author: रणबीर सिंह यादव

  • Edition: अक्टूबर 2020

  • Cover: Paperback

  • Multiple Book Set: No

About the Book
यह पुस्तक समकालीन भारतीय राजनीति और जनआंदोलनों के एक अत्यंत महत्वपूर्ण दौर को केंद्र में रखकर लिखी गई है। लेखक रणबीर सिंह यादव ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) को लेकर भारत सरकार द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में कानून पारित किए जाने के बाद देशभर में हुए तथा चल रहे आंदोलनों को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की रचना की है।

किताब में इन कानूनों की पृष्ठभूमि, उनके सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव तथा आम जनता की प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक यह समझाने का प्रयास करते हैं कि किस प्रकार ये कानून नागरिकता, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े व्यापक प्रश्नों को जन्म देते हैं। साथ ही, आंदोलनों के दौरान सामने आए जनभावनाओं, विरोध के स्वरूप और सामाजिक चेतना को भी विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

यह पुस्तक उन पाठकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो समकालीन भारतीय राजनीति, सामाजिक आंदोलनों, लोकतांत्रिक अधिकारों और नागरिक मुद्दों को गहराई से समझना चाहते हैं। विचारोत्तेजक भाषा और तथ्यात्मक संदर्भों के साथ लिखी गई यह कृति वर्तमान समय की एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ के रूप में भी देखी जा सकती है।